Sunday, August 5, 2018

ऐ अबला!


ऐ अबला! 

उठना सम्हलना तुझे ही पडेगा,
हक़ अपना ख़ुद बढ़के ही लेना पड़ेगा।
क्यों छोड़ेगा कोई अपना साम्राज्य? 
अति की लज्जा नहीं क्या है त्याज्य?? 

बच्चों को समता की घुट्टी पिला तू, 
लड़की को शिक्षा से निर्भय बना तू।
घर नहीं तुझसे ही बनता क्या न्यारा? 
ना बिगड़ेगा क्या और देरी से सारा??

घर के काम की भी है सीमा ज़रूरी, 
ख़ुद की सेहतो-आराम सबसे ज़रूरी.
क्या सबको स्व-निर्भर बनाना बुरा है?
नहीं क्या ये मक़सद ही तेरा बड़ा है?? 

'
बेदिल' बदायूंनी 05/08/2018.

No comments:

Post a Comment