Friday, April 3, 2020

सपनों में हाइकु

मैँ सपने में
लिखता हूँ हाइकु,
थोड़े सुन्दर

पिछली बार
लिखे थे पति पर,
पाँच हाइकु

तुम जिस्म से
अलग भी तो हो ना,
ज़िंदा इन्सान

हर सवाल
मेरा अच्छा लगेगा,
ज़रूरी है क्या!

जवाब देना
मुश्किल था अगर,
चुप रहते

इरादा नही,
रास्ता बदलना है,
बहुत अच्छा

साथ रहने
में समझदारी है,
बात करिए

तन्हा ज़िन्दगी,
कटना मुश्किल है।
आगे बढिए

मन पुकारे
प्रणय निवेदन
करो स्वीकार

पति की दशा! कुछ हाइकु

पति बेचारा
प्रेम रोग का मारा,
है न कहीं का!

विवाह पूर्व,
थे गुण सब प्यारे,
चुभते वे ही!

ख़ुद पत्नी को,
कच्ची मिट्टी करके,
स्वर्ण चाहे है!

अपना किया,
दुहाई बच्चों की दे,
ताने है मारे!

वो चाहता क्या,
नहीं जानता ख़ुद,
दुम ही काटे!😢