Sunday, March 3, 2019


क्रोध पर ही,
पेश कर रहा हूँ,
कुछ हाइकु!

क्रोध बहुत,
जब करता मैं था,
कमज़ोर था!

सुधरा कुछ
ही जो अब हूँ थोड़ा,
अस्थिर सा हूँ!

सीखा जो कुछ,
लिख रहा हूँ आज,
बड़े यत्न से!

क्रोध आए तो,
पीजिए, नहीं छोड़िये,
शब्दों के वाण!

अनगिनत,
उसे, घाव दिए हैं,
घायल हूँ मैं!

है प्रयास ये,
अब भूल ना करूँ,
रहूँ सचेत!

No comments:

Post a Comment