Tuesday, July 12, 2022

आज पिता के बारे में

 पिता महिमा

अति अल्प वर्णित 

श्रेष्ठ अत्यंत 


उसकी निष्ठां

निज संतति हेतु

अतुल्य सदा


चुप रहे वो

सामान्य बातों पर

नहीं अन्यथा


माँ से उच्च

है धैर्यवान पिता

बच्चे न मानें


ढाल है वही

पूरे कुटुंब की भी

जीवन भर


क्रोध उसका

विकट होता शीघ्र

पर क्षणिक 


हिंसक भी वो

हो ही जाता है तभी

किन्तु मोह में 


प्रेम न कभी

उसका घटता है

अपितु बढे


सीखता रहे

नित प्यार की कला

अर्धांगिनी से


उम्र के साथ

वह निखरता है

कंचन सम


प्रौढ़ होने पे

लगता वो क्षीण है 

स्नेह न घटे 


राय उसकी

असह्य तो लगती

बिन माँगे पे 


जान ही लेते 

इस मर्म को सभी

बड़े होकर 


काश ये ज्ञान

मिल सके शिशु को 

शैशव में ही


शिक्षा यह भी 

प्रारम्भ होनी चाहिए

हर स्कूल में 


तभी तो होगा

सर्वांगीण विकास

पूरे विश्व का


इसके लिए

केवल सनातन 

ही सक्षम है


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