Wednesday, September 1, 2021

ज़िन्दगी खुल कर जिएं

 आज सुबह सपने में मन 

इन शब्दों पर थिरक रहा था😊


आओ   अपनी  ज़िन्दगी  को  खुल  के  हम जिएं।

और   इसके  हर  इक  पल  में   

रंग  ख़ुद  भरें।


क्यों  किसी  की  फ़िक्र  भी  हम  बेवजह  करें।

और  दख़ल  न  हम   किसी  की  ज़िन्दगी  में  दें।


हम  सभी  को  है   बनाया  उसी  एक ने।

और  उसी  का   कोई  रूप   सजा 

है   मन  में।


रूप  वो  सभी  के  मन  में   हैं   अलग  अलग।

और   ये   भी   सच  है   कि   वो   हैं  नहीं   विलग।


कोई  थोड़ा  काला  है   तो  गोरा  कोई  अधिक।

और   सच   है   ये   भी   कि   अन्तर  नहीं   तनिक।


हर   किसी  का   धर्म   औ   मज़हब  जुदा  जुदा।

और    हर   इक    जानता   वो  है   नहीं   जुदा।


क्यों   किसी    बहकावे   में   आकर  के   हम    लड़ें।

और     क्यों    न    मिलके   साथ   प्रेम   से   रहें।


ख़ुद   ही   हम   को   खोजना   है   अपना   रहनुमा।

और   हमेशा   याद   रखना   हों   न   बदगुमां।


हर    मुक़ाम    औ    ख़ुशी   तो  मौजूद   है    यहीं।

और    उसको    पाने    की   है   राह   बस   यक़ीन।


कभी   मन्ज़िल    पास   लगती    है   तो    कभी    दूर।

और    किसी     कोशिश   से   वो    मिलती  है    ज़रूर।


अपने    इरादों    को    हम   मज़बूत    ही   रखें।

और    मुश्किलों   से    तो   कभी   भी     न    डरें।


मिलेगी    कामयाबी    और    ख़ुशियाँ  हमें    अपार।

और    हर   मुक़ाम   पे    पहुँच  के   देंगे   उसे   आभार।


No comments:

Post a Comment