Wednesday, September 1, 2021

स्थितप्रज्ञ हाइकु

 स्थितप्रज्ञ हों

लगातार प्रयत्न

करते रहें


इस दिशा में

जानना शुरू करें

बचपन से


बदलें उसे

जो है अपने वश

अन्यथा मानें


विवेकशील

होकर अध्ययन

करना सीखें


अपेक्षा और

इच्छा सीमित रखें

श्रम अधिक


स्नेह फैलाएं

क्रोध करें वश में

निरन्तर ही


शिक्षा कम दें

स्वयम कर सिखाएं

प्रगति करें


भूल किसी की

भी सदा क्षमा करें

स्नेह ही देवें


आयु बढ़े तो

साहस-धैर्य बढ़े

लालसा घटे


अपेक्षा कम

करना ही सीखिए

किसी और से


अपने साथ

रहना भी सीखिए

कुछ समय


सुख संतोष

मन के अन्दर ही

न कहीं और


बिना आपकी

स्वीकृति असंभव

अपमान भी


व्यर्थ है चिंता

लोग क्या कहेंगे की

मस्त रहिए


स्वर्ग भी यहीं

पा सकते हैं हम

निर्लिप्त बन



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