Monday, August 29, 2022

आँखें मूँद के

 आँखें मूँद के,

खग सोच सकता,

बिल्ली नहीं है.


उचित न ये,

किसी मनुष्य हेतु,

कभी कहीं भी.


प्रतीत होने,

वाली समस्याएं भी,

उद्विग्न करें.


ज़िक्र उनका,

ज़रूरी हो जाता है,

परिवार में.


चर्चा उनपे,

खुले मन से शीघ्र,

होनी चाहिए.


अन्यथा वही,

विस्फोट का रूप भी,

ले सकती हैं.


ऐसी स्थिति तो,

किसी घर में कभी,

भी आ सके है.


समझदारी,

हमेशा सावधानी,

में ही होती है.


ध्यान इसका,

रखना ही चाहिए,

हर व्यक्ति को.

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