Friday, September 9, 2022

पीढ़ी अन्तर?

 देखा ख़्वाब क्या,

कल रात अजीब,

हक़ीक़त सा.


सभी के बीच,

पिता के बाल सखा,

सँग मैं भी था.


मान व डर,

में क्या होता प्रमुख,

पिता पुत्र में?


यही था चर्चा,

का मौलिक विषय,

तीनों के बीच.


उन्होंने कहा,

मान, किन्तु डर था,

मेरा कहना.


कुछ देर में,

वे भी समझ गए,

मेरी बातों को.


उन्होंने कहा,

उन्हें ऐसा व्यवहार 

मिला जन्म से.


और वो बनी,

उनकी भी आदत,

बड़े होकर.


तभी ये सोचा,

क्या मैं कुछ सुधरा,

जीवन भर!


पीढ़ियों से ही,

ये आदत बढ़ती,

चली जा रही.


बच्चे भी ढीठ,

बड़े होते जा रहे,

उत्तरोत्तर.


सुनते तो हैं,

वो सारी बातें किन्तु,

करें मन की!


परिवारों में,

बढ़ती जा रही है,

अदृश्य दूरी.


मनन भी है,

बड़ा ज़रूरी यहाँ,

निर्णय पूर्व.


रोकना होगा,

इस विघटन को,

सूझ बूझ से.

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